Monday, April 12, 2010

"prabhutvashali लोग जिस विचार को फैलाते है ,जो सर्वहारा वर्ग को लगे की वह अपने हित की है ,पर वह उच्चभ्रू लोगो के हित की होती है "इसीको मार्क्स विचारधारा मानते है ,इसी कारन वे ऐसी विचारधाराओ को नकारात्मक विचारधारा कहते है। हिगेल , मार्क्स ने पहली बार समाज शास्त्र में इसका उपयोग किया था ,ऐउसा भी कहा जाता है की ,"मार्क्सवाद वह पहली विचारधारा है जिसमे सर्वहारा वर्ग का हित नजर आता है "

प्रसिद्ध दार्शनिक 'जिज़ेक' के अनुसार ,"हमें पता नहीं है ki हम क्या कर रहे है ,लेकिन हम वह लगातार करते जा रहे है ,यह विचारधारा है " जैसे की धार्मिक विचारधारावाले लोग हर रोज अनेक कर्मकांड करते रहते है ,मसलन हिन्दू धर्म में जीवन से मृतु तक सोलह सस्कर माने जाते है ,एक हिन्दू व्यक्ती vअह सारे सस्कर यथा योग्य पद्धति से करता है ,ब्राम्हणों के अनुसार वह साडी क्रिया करता है ,पर वह इतना नहीं जानता की यह सब मै क्यू कर रहा हूँ । इससे क्या लाभ ,प्रत्यक्ष रूप से देखा जाये तो इसमें ब्रक्म्हानो को दान-दक्षिणा के रूप में लाभ मिला रहा है मात्र वह व्यक्ती तो कंगाल होता जा रहा है । इसे नकारात्मक विचारधारा कहेंगे ,इसी प्रकार प्रबोधन के पूर्व तक यूरोप में और आशिया में ऐसी ही स्थिथि थी ।

एतिहासिक परिद्रश्य में देखा जाये तो अनक विचारधारा पायीं जाती है जिससे उनकी विकास की अवधारणा को परिभाषित किया जाता है , परन्तु विश्व में मान्यताप्राप्त विचारधारा निम्न है-------

१- अमेरिकन मॉडल {पूंजीवाद}

२-रशियन मोडल {साम्यवाद}

३-गांधियन मोडल {सर्वोदय समाज}

४-नेहरूवियन मॉडल {पंचवार्षिक योजना}

५-कल्याणकारी राज्य की आवधारना

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